आइजोल · Northeast

मुख्यमंत्री
ZPM · 2023 से पद पर
घोषित आँकड़े चुनाव आयोग के हलफ़नामे (2023) से, MyNeta/ADR के ज़रिए — जैसे घोषित, सत्यापित नहीं। पट्टियाँ मूल प्रकाशक की 0–100 मैपिंग हैं (शिक्षा-मैपिंग; कानूनी: 100 − गंभीर×18 − अन्य×10) — उनकी, हमारी नहीं।
ये 0–100 रेटिंग the original publisher की अपनी हैं, यहाँ उनकी कार्यप्रणाली के साथ उद्धृत। Audit India कोई स्कोर नहीं बनाता — वैसे ही जैसे हम UNDP का HDI, UNDP के आँकड़े के रूप में दिखाते हैं।
पारदर्शिता
50/ 100
the original publisher
यहाँ दो निष्कर्ष दिए गए हैं, दोनों कैग के प्रतिवेदन संख्या 1/2025 से और स्वयं प्रतिवेदन से मिलान करके: आपदा तैयारी और शहरी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की निष्पादन लेखापरीक्षाएँ। इस टिप्पणी के साथ दिया गया अंक मूल प्रकाशक ने 2025 के प्रतिवेदन संख्या 01-04 के हवाले से दिए गए चार निष्कर्षों पर दिया था; उन संख्याओं वाले मिज़ोरम के प्रतिवेदन दूसरे विषयों पर हैं और कोई आँकड़ा नहीं मिला, इसलिए वे वापस ले लिए गए हैं। मिज़ोरम का पारदर्शिता अंक ZPM सरकार की घोषित सुधार-प्रतिबद्धता और चर्च की मज़बूत नागरिक-जवाबदेही संस्कृति से संतुलित होता है। मिज़ोरम प्रेस्बिटेरियन चर्च अनौपचारिक शासन-प्रहरी की भूमिका निभाता है — मिज़ोरम भारत का सबसे अधिक चर्च-शासित राज्य है, और सामाजिक मानदंडों (1996 से शराबबंदी), शिक्षा व स्वास्थ्य पर चर्च का प्रभाव ऐसी नागरिक जवाबदेही-व्यवस्था बनाता है जो अधिकांश भारतीय राज्यों में नहीं है।
पदाधिकारियों की विधिक शुचिता
100/ 100
the original publisher
10 विशिष्ट पदाधिकारी गिने गए (राज्यपाल को छोड़कर)। सभी 10 — मुख्यमंत्री लालदुहोमा, अध्यक्ष लालरिनलियाना सैलो, उप मुख्यमंत्री वनलालह्लाना, एफ. रोहलुना, के. सपदंगा, डॉ. लालरिनसंगा, लालछंदामा राल्ते, सी. लालसाविवुंगा, के. पोंगते और (10वें) लालथनसंगा (वाणिज्य) — ने 2023 के ECI हलफ़नामों में 0 आपराधिक मामले घोषित किए। औसत: (100×10) ÷ 10 = 100। ZPM की 2023 की जीत स्वच्छ-शासन के मुद्दे पर (ज़ोरमथंगा के नेतृत्व वाली MNF सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों के विरुद्ध) आई, जिससे हाल के मिज़ोरम इतिहास की सबसे मज़बूत भ्रष्टाचार-विरोधी जनादेश वाली मंत्रिपरिषद बनी। मुख्यमंत्री लालदुहोमा की IPS पृष्ठभूमि शुचिता पर संस्थागत विश्वसनीयता जोड़ती है।
शासन
56/ 100
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समग्र: संकेतक औसत (57/100) × 50% + पारदर्शिता (50/100) × 25% + शुचिता (100/100) × 25% = 28.5 + 12.5 + 25 = 66; घटाकर 56, कारण: (1) मनरेगा की आपूर्ति-विफलता (16.8% — भारत में सबसे कम; 52 दिन की मज़दूरी-देरी — भारत में सर्वाधिक) कार्यक्रम-वितरण में बुनियादी प्रशासनिक क्षमता की कमी दिखाती है — ZPM सरकार नई है और इन संरचनात्मक अड़चनों को अभी सुलझा नहीं पाई; (2) जल जीवन मिशन 76.4% (पूर्वोत्तर में सबसे कम) और म्यांमार शरणार्थी शिविरों में जल-आपूर्ति का शून्य होना मानवीय कार्यक्रमों की खाई दिखाता है; (3) राज्य की वित्तीय स्थिति — 86% केंद्रीय हस्तांतरण पर निर्भर, और ₹280 करोड़ का अप्रतिपूर्त शरणार्थी व्यय — सरकार की स्वायत्त शासन-क्षमता सीमित करती है; (4) एचआईवी संकट (2.03% प्रसार — भारत में सर्वाधिक) में केवल 42% ART कवरेज गंभीर जन-स्वास्थ्य शासन-विफलता है। (यह आकलन मूल प्रकाशक का है।)
0–100 के छल्ले मूल प्रकाशक के श्रेणी स्कोर हैं, उन्हीं के रंगों में — उनके, हमारे नहीं।
ये आँकड़े मूल प्रकाशक से लिए गए हैं, जिसने इन्हें साथ लिखे प्रकाशनों से संकलित करने के बजाय एक भाषा-मॉडल से तैयार किया था। जिन 38 के आँकड़े उनके बताए स्रोत में मिले ही नहीं, वे हटा दिए गए; 45 की पुष्टि उनके स्रोत से हो गई। शेष जिस प्रकाशन का नाम देते हैं, उससे हम उन्हें मिला नहीं सके — इन्हें मूल प्रकाशक के आँकड़ों के रूप में पढ़ें, सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं।
नीचे दिए आँकड़े वही हैं जो प्रत्येक व्यक्ति ने अपने ईसीआई या राज्यसभा शपथपत्र में स्वयं घोषित किए। हम इन्हें दर्ज करते हैं; स्कोर नहीं देते। शिक्षा के नीचे की छोटी पट्टियाँ मूल प्रकाशक की घोषित योग्यता की 0–100 मैपिंग हैं — उनका ढाँचा, हमारा मापन नहीं।
| नाम | पद | दल · कब से | घोषित मामले | घोषित योग्यता | शपथपत्र |
|---|---|---|---|---|---|
| LLalduhoma | मुख्यमंत्री | ![]() | 0 | Graduate | 2023 |
| HBHari Babu Kambhampati | राज्यपाल | — | — | — | — |
| LSLalrinliana Sailo | अध्यक्ष, मिज़ोरम विधान सभा | ![]() | — | — | — |
| VVanlalhlana | उप मुख्यमंत्री एवं राजस्व, भू-अभिलेख मंत्री | ![]() | 0 | Post Graduate | 2023 |
| FRF. Rohluna | कृषि, वन एवं ग्रामीण विकास मंत्री | ![]() | — | — | — |
| KSK. Sapdanga | पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं आपदा प्रबंधन मंत्री | ![]() | 0 | — | 2023 |
| DLDr. Lalrinsanga | स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री | ![]() | — | — | — |
| LRLalchhandama Ralte | विद्यालयी शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री | ![]() | 0 | Post Graduate | 2023 |
| CLC. Lalsawivunga | उद्योग, व्यापार एवं वाणिज्य, पर्यटन मंत्री | ![]() | 0 | Graduate | 2023 |
| KPK. Pongte | ऊर्जा एवं विद्युत, शहरी विकास मंत्री | ![]() | — | — | — |
इस राज्य में चल रही योजनाओं पर कैग की लेखा-परीक्षा रिपोर्टों के निष्कर्ष, रिपोर्ट संदर्भ के साथ यथावत। हम अपनी ओर से कोई ग्रेड नहीं जोड़ते।
Disaster Preparedness and Management — Mizoram
ऐसे राज्य में जहाँ भूस्खलन आम ख़तरा है, आपदा प्रबंधन की राज्य सलाहकार समिति 2017-18 से 2021-22 के बीच एक बार भी नहीं बैठी। राज्य व राष्ट्रीय आपदा योजनाओं की अपेक्षा के अनुसार भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण नहीं हुआ। आइजोल के हुनथर वेंग धँसाव क्षेत्र में मिट्टी की जाँच एक बार हुई; लेखापरीक्षा अवधि में राज्य के भूस्खलन-ख़तरा क्षेत्रों में सामग्री-परीक्षण हुआ ही नहीं।
लेखा-परीक्षा ने क्या मापा
2015 से राज्य योजना में प्रस्तावित स्वचालित भूस्खलन निगरानी तंत्र अब तक स्थापित नहीं हुआ। भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, सूखा, चक्रवात या बादल फटने के लिए अलग मानक संचालन प्रक्रियाएँ नहीं थीं, और राज्य में बार-बार आने वाले ख़तरों के लिए किसी विभाग ने जाँच-सूची नहीं बनाई। 2020-21 और 2021-22 में चिकित्सा व पुलिसकर्मियों को कोई प्रशिक्षण नहीं मिला और कोई मॉक ड्रिल नहीं हुई। राज्य के पास समर्पित राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की बटालियन नहीं है। लेखापरीक्षा ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि से अस्वीकार्य मदों पर हुआ व्यय भी दर्ज किया।
Solid Waste Management in Urban Areas — Mizoram
मिज़ोरम के शहरी निकायों को यह पता ही नहीं कि वे कितना कचरा पैदा करते हैं — उसे मापने के लिए तौल-पुल ही नहीं हैं। संग्रह से पहले और बाद में पृथक्करण नगण्य था। निपटान का सबसे आम तरीक़ा कचरा फेंकना रहा: आइजोल की प्रसंस्करण सुविधाओं का कम उपयोग हुआ, और लुंगलेई व लॉन्गतलाई में तो कोई प्रसंस्करण सुविधा और वैज्ञानिक लैंडफ़िल है ही नहीं। तीनों शहरों के डंपिंग स्थलों पर अनुपचारित कचरा खुले में पड़ा है, और कचरा जलाए जाने की घटनाएँ भी देखी गईं।
लेखा-परीक्षा ने क्या मापा
अधिकांश संग्रह-वाहन खुले और ओवरलोड थे, और किसी में GPS नहीं था। स्थानीय परिषदों द्वारा वसूला गया उपयोगकर्ता शुल्क आइजोल नगर निगम को नहीं भेजा गया। घरेलू ख़तरनाक कचरे का पृथक्करण ठीक से नहीं हुआ। सफ़ाईकर्मियों को सुरक्षा उपकरण — वर्दी, जैकेट, बरसाती — नहीं दिए गए, और आइजोल नगर निगम में जहाँ दिए भी गए वहाँ सब कर्मी उन्हें पहनते नहीं थे। तुइरियल लैंडफ़िल की स्थापना से दिसंबर 2022 तक वहाँ कोई नमूना जाँचा ही नहीं गया।
वादे और उनकी पूर्ति की स्थिति मूल प्रकाशक से हैं और उन्हीं का आकलन हैं, हमारा नहीं। ये घोषणापत्र के बजाय दल के मुखपृष्ठ का हवाला देते हैं, इसलिए दिए गए स्रोत से यह जाँचा नहीं जा सकता कि वादा क्या था। Audit India ने न शब्दों की पुष्टि की है, न स्थिति की।
नीचे जहाँ कैग का निष्कर्ष उद्धृत है, उसके आँकड़े उसी रिपोर्ट से मिलाए गए हैं। सैंतीस निष्कर्ष हटाए गए, क्योंकि जिस रिपोर्ट का नाम उन्होंने दिया वह मौजूद ही नहीं है या एक खोज-पृष्ठ है।
शून्य भ्रष्टाचार: सभी सरकारी अनुबंधों के लिए सार्वजनिक जवाबदेही
ZPM सरकार ने ऑनलाइन अनुबंध प्रकाशन और सामाजिक ऑडिट पायलट शुरू किया। दिसंबर 2023 में पदभार — मूल्यांकन के लिए जल्दी।
ART केंद्र और HIV उपचार विस्तार; गोल्डन ट्राइएंगल मार्ग पर नशा तस्करी से लड़ना
मिज़ोरम में एचआईवी प्रसार 2.03% है — राष्ट्रीय औसत का पाँच गुना — जिसे म्यांमार-मिज़ोरम-असम गलियारे पर सुई से नशा चलाता है। ZPM सरकार (दिसंबर 2023 से) ने यंग मिज़ो एसोसिएशन और मिज़ोरम राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी की साझेदारी वाला तरीक़ा जारी रखा। मुख्य आँकड़े: 11,500+ एचआईवी मरीज़ ART पर (80% लिंकेज — पूर्वोत्तर औसत से बेहतर)। आइजोल और लुंगलेई में 12 स्थानों पर सुई-विनिमय कार्यक्रम। पर ज़ोखावथार (चम्फाई जिला — भारत-म्यांमार सीमा कस्बा) से नशा तस्करी पूर्वोत्तर के बाज़ार की आपूर्ति करती रहती है। म्यांमार गृहयुद्ध (2021 से जारी) ने सीमा-प्रबंधन उलझा दिया है — मिज़ोरम भागकर आए म्यांमारी चिन विद्रोही हथियार और कुछ नशा-नेटवर्क भी लाए हैं। ZPM सरकार का रुख़: म्यांमार सीमा के अशासित रहते मिज़ोरम अकेले नशा संकट हल नहीं कर सकता।
FRBM नियमों में मिजोरम का वित्त; केंद्रीय निर्भरता घटाना; स्वयं राजस्व बढ़ाना
मिज़ोरम भारत के सबसे अधिक केंद्र-निर्भर राज्यों में है (राजस्व का 91% केंद्रीय हस्तांतरण से)। राज्य पर क़र्ज़ ₹21,400 करोड़ (ऋण-GSDP अनुपात 45.2% — किसी भी राज्य के लिए भारत में सर्वाधिक में); ब्याज भुगतान ₹1,800 करोड़ = राजस्व प्राप्तियों का 22.1% — FRBM चेतावनी-सीमा से काफ़ी ऊपर। दिसंबर 2023 में आई ZPM सरकार ने अभी इस दिशा को बदलकर नहीं दिखाया है। म्यांमार शरणार्थियों पर व्यय (सरकार के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य व भोजन में ₹180 करोड़/वर्ष) संरचनात्मक दबाव और बढ़ाता है। राज्य की उच्च साक्षरता और शिक्षित आबादी संपत्ति हैं, पर छोटा बाज़ार (12 लाख लोग) और सीमित प्राकृतिक संसाधन का अर्थ है कि केंद्रीय हस्तांतरण पर संरचनात्मक निर्भरता दशकों तक अपरिहार्य रह सकती है।
अपना कर-राजस्व कुल प्राप्तियों का 6.4% (लक्ष्य 10%); ब्याज भुगतान राजस्व का 22.1% — FRBM की 15% सीमा से बहुत ऊपर; 91% केंद्रीय हस्तांतरण पर निर्भरता; म्यांमार शरणार्थी सहायता की लागत ₹180 करोड़/वर्ष।
ऐजॉल बाईपास रोड और NH-306 उन्नयन; पहाड़ी जिला सड़क कनेक्टिविटी
ऐजॉल: एकल NH-306 पर निर्भर; भारत की सबसे खराब राजधानी यातायात में से एक। AORR (27 किमी): ₹1,840 करोड़; 40% निर्माण (मध्य 2026); पूर्ण 2028। Lengpui Airport: runway विस्तार feasibility। NH-306: 65% सुधार।
HIV महामारी नियंत्रण; ZMC (ज़ोरम मेडिकल कॉलेज) मजबूत करना; सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज
HIV: 1.36% — भारत में सर्वोच्च। ZMC: ₹380 करोड़ नया परिसर। ART: 82% (राष्ट्रीय 71% से अधिक)। PMJAY: 2.2/2.8 लाख (79%)। ग्रामीण डॉक्टर रिक्ति: 34% — देश में सबसे खराब।
मिजोरम का जैविक प्रमाणीकरण विस्तार; अदरक, केला, एन्थुरियम निर्यात
जैविक: 38,000 → 62,000 हेक्टेयर। अदरक: 23,000+ हेक्टेयर। एन्थुरियम: भारत का 60% वाणिज्यिक उत्पादन। Mizo chilli: GI, 14,000 हेक्टेयर। MOSS: 8,200 किसान सीधे Kolkata-Guwahati रिटेलर से।
महिला सशक्तिकरण; घरेलू हिंसा उन्मूलन; Mizo महिला संगठनों का समर्थन
YMA: 2.5 लाख सदस्य। MHIP: घरेलू हिंसा + शराब विरोधी। DV: 12.8/1,000 (राष्ट्रीय 29.6 से कम)। Mizo महिलाएं: 40% Aizawl खुदरा। वृद्धा पेंशन ₹1,500: 58,000 महिलाएं।
निजी क्षेत्र रोजगार; Champhai सीमा पर म्यांमार शरणार्थी संकट प्रबंधन
2021 Myanmar coup: 40,000+ Chin शरणार्थी। GoM ने मानवीय सहायता दी (₹180 करोड़)। EPFO: मात्र 22,000 औपचारिक रोजगार। सरकारी: 85,000+। ZPM: IT/BPO — 95% English literacy।
मिजोरम विश्वविद्यालय विस्तार; Class 12 परिणाम; Mizo युवाओं के लिए 100% स्नातक
साक्षरता: 91.3% (तीसरी)। MBSE Class 12: 83.6%। NIT MZ: 1,800 छात्र। MZ University: 3 नए विभाग। Brain drain: Seoul EPS (South Korea Employment Permit) — Mizo English+Korean कौशल लाभ।
NLUP जारी: जनजातीय किसानों को झूम खेती से बाहर निकालने में सहायता
NLUP (₹1 लाख/परिवार → स्थायी बागवानी) जारी। 1.23 लाख परिवार। झूम अभी भी ~2 लाख हेक्टेयर। पूर्ण बदलाव नहीं।
नशा मुक्त मिजोरम: हेरोइन और मेथाम्फेटामाइन की लत का उन्मूलन
YMA अभियान और DCHC उपचार। जब्ती बढ़ी। लेकिन म्यांमार सीमा की पारगम्यता से पूर्ण उन्मूलन कठिन।
मिजोरम का ऋण नियंत्रित करना; स्वयं कर राजस्व बढ़ाना; सरकारी रोजगार रजिस्टर तर्कसंगत
MNF 2018: ऋण ₹15,800 करोड़; वेतन 48%। biometric attendance: ₹80 करोड़/वर्ष बचत। 220 कार्यालय बंद। आबकारी ₹45→₹120 करोड़। 2023 तक ऋण ₹19,400 करोड़। केंद्रीय निर्भरता 89% — संरचनात्मक सीमा।
NH-306 का 4-लेन; Lengpui हवाईअड्डा सुधार; सभी 8 जिलों को सदाबहार सड़क
NH-306: 68 किमी सुधार, ₹1,200 करोड़। 2021-22: 38 दिन बाधित। PMGSY: 1,840 किमी, 420 गांव। Lengpui ILS: रद्दीकरण 28% → 8%। Bairabi-Sairang रेल: केवल 8 किमी earthwork (2023 तक)।
50,000 मिजो युवाओं को SEDP प्रशिक्षण; 10,000 सरकारी नौकरियाँ; Start-Up Mizoram
SEDP: 22,000 प्रशिक्षित (लक्ष्य 50,000 का 44%)। सरकारी भर्ती: ~8,500। Start-Up Mizoram: 280 startup। युवा पलायन जारी।
सभी 8 जिलों में OAT उपचार; सभी PLHIV के लिए 90% ART कवरेज; सुई विनिमय कार्यक्रम विस्तार
HIV प्रसार 2.04% — भारत में सर्वाधिक (IDU-संचालित)। OAT केंद्र 14 → 38; 9,200 PWUD। ART 82%। NSEP: 4.2 लाख स्वच्छ सिरिंज/वर्ष। ~6,000 PWUD अभी OAT से बाहर।
50% झूम किसानों को स्थायी खेती में; MIDH के तहत अदरक और bird's eye chilli जैविक निर्यात
60% परिवार झूम करते हैं। NLUP Phase 2: 12,000 परिवार स्थायी खेती में। अदरक निर्यात ₹18 → ₹67 करोड़। Chilli GI 2019; 4,200 टन। 50% लक्ष्य — केवल 20% हासिल।
ब्रू-रियांग विस्थापन संकट का समाधान; 32,000 शरणार्थियों का पुनर्वास
ब्रू 1997 से Tripura शिविरों में। जनवरी 2020: GoI-MZ-TR-ब्रू चतुष्पक्षीय समझौता। GoI: ₹661 करोड़। 6,300 परिवार 11 नए गांवों में (दिसंबर 2023)। YMA विरोध के बावजूद MNF की स्वीकृति।
मिजोरम को भारत की बांस राजधानी; बांस औद्योगिक क्लस्टर; ASEAN को बांस उत्पाद निर्यात
NBM: ₹68 करोड़। Aizawl बांस पार्क: 12 इकाइयाँ, 840 नौकरियाँ। MIFCO: 12,000 टन ₹5/किग्रा। निर्यात ₹28 करोड़। Muli बांस (48-वर्षीय फूल चक्र) की निगरानी।
सरकार के प्रमुख कार्यक्रम के रूप में नई भू-उपयोग नीति (NLUP) लागू करते रहना, ताकि निर्धन किसानों का जीवन सुधरे और झूम खेती, ग्रामीण-शहरी पलायन तथा ग्रामीण ऋणग्रस्तता रुके।
NLUP (जनवरी 2011 में शुरू) 2013-18 में राज्य का प्रमुख कार्यक्रम बना रहा: कृषि व संबद्ध विभागों में इसके चरण चले (अकेले बागवानी ने चार चरणों में 24,838 परिवार कवर किए, और 2014 से बंदी-बागान भी), जबकि लक्ष्य लगभग 1,20,000 परिवारों का था, और 2016-17 से इसे NEDP का सहारा भी मिला। इसे उत्तरवर्ती MNF सरकार ने 2019 में ही बंद किया। स्वतंत्र अध्ययनों ने झूम खेती पर इसका असर आंशिक ही पाया, पर वादा — इसे प्रमुख कार्यक्रम के रूप में लागू करते रहना — निभाया गया।
बीपीएल सूची का नया सर्वेक्षण कराना, ताकि पात्र परिवार शामिल हों और अपात्र बाहर हों।
2016 से नया बीपीएल आधार-सर्वेक्षण हुआ (तेंदुलकर समिति के मानकों पर) और उसके नतीजे जून 2018 में जारी हुए: 56,584 बीपीएल परिवार (परिवारों का 19.63%), यानी 2015 की 1,37,800 परिवारों की सूची से 41% कम — यानी वादे के अनुरूप बड़े पैमाने पर अपात्रों का बहिष्कार।
भारत-म्यांमार और भारत-बांग्लादेश सीमा-व्यापार का मुद्दा केंद्र के साथ उठाना, ताकि अवैध व्यापार रुके और वैध सीमा-पार व्यापार फले-फूले।
कार्यकाल में ज़ोखावथार (चम्फाई) पर भारत-म्यांमार सीमा-व्यापार औपचारिक हुआ — मार्च 2015 में भू-सीमा शुल्क केंद्र का उद्घाटन और दिसंबर 2015 में औपचारिक व्यापार अधिसूचित। पर इस केंद्र से औपचारिक व्यापार नगण्य और लगभग निष्क्रिय रहा, अनौपचारिक व्यापार ही हावी रहा, और भारत-बांग्लादेश व्यापार-बिंदु (कावरपुइछुआह) चालू नहीं हुआ।
युवाओं की रोज़गार-योग्यता बढ़ाने के लिए देश और विदेश, दोनों के लिए व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम चलाना, और इस हेतु मिज़ोरम राज्य युवा आयोग तथा श्रम एवं रोज़गार विभाग को मज़बूत करना।
कार्यकाल में कौशल-प्रशिक्षण बढ़ा — मिज़ोरम युवा आयोग ने कौशल विकास, कोचिंग और प्लेसमेंट कार्यक्रम चलाए, और केंद्रीय मिशन (2015 से PMKVY, DDU-GKY, राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन) राज्य में लागू हुए। पर वादे के अनुरूप व्यापक कार्यक्रम का कोई अभिलेख नहीं है।
ग्रामीण क्षेत्रों की तीव्र आवास-समस्या हल करने के लिए 'मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना' नाम से नई योजना शुरू करना, जिसमें लाभार्थी पर बोझ न्यूनतम हो।
मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना वादे के अनुसार शुरू हुई, सरकार की नई आर्थिक विकास नीति के तहत: पहले 2016-17 में सेरछिप, लॉन्गतलाई और सियाहा जिलों में (₹6 करोड़ व्यय), जिसमें ग्रामीण विकास विभाग/DRDA क्रियान्वयन एजेंसी थे और जिला-स्तर पर निगरानी हुई।
मिज़ोरम शिक्षा सुधार आयोग की सिफ़ारिशों और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों को चरणबद्ध ढंग से लागू करना।
कार्यकाल में राज्य में RTE अधिनियम के प्रावधान वैधानिक रूप से लागू हुए (मिज़ोरम RTE नियम, पड़ोस-विद्यालय मानदंड, SSA-आधारित प्रारंभिक शिक्षा)। पर मिज़ोरम शिक्षा सुधार आयोग की 116 सिफ़ारिशों के व्यवस्थित, चरणबद्ध क्रियान्वयन का कोई प्रकाशित अभिलेख नहीं है।
प्रारंभिक स्तर पर 100:100 शुद्ध नामांकन अनुपात का लक्ष्य रखना, ड्रॉपआउट घटाना, और स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा अधिक व्यापक व गहन रूप से देना।
प्रारंभिक नामांकन लगभग सार्वभौमिक बना रहा और केंद्रीय योजनाओं में ICT/कंप्यूटर शिक्षा फैली, पर 100:100 शुद्ध नामांकन लक्ष्य हासिल नहीं हुआ और ड्रॉपआउट गंभीर समस्या बनी रही: राज्य के अपने आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 ने प्राथमिक स्तर की वार्षिक औसत ड्रॉपआउट दर उल्लेखनीय बताई।
राज्य रेफ़रल अस्पताल को 150 बिस्तरों से 400 बिस्तरों तक उन्नत करना, और अंततः उसे मेडिकल कॉलेज बनाना।
राज्य रेफ़रल अस्पताल, फल्कावन को 150 से बढ़ाकर अधिसूचित 300 बिस्तरों का किया गया (2 फ़रवरी 2016) — वादे के 400 से कम — पर अंतिम लक्ष्य कार्यकाल में ही पूरा हुआ: मिज़ोरम का पहला मेडिकल कॉलेज (ज़ोरम मेडिकल कॉलेज) इसी अस्पताल में स्थापित हुआ।
राज्य में 50 बिस्तरों का मानसिक चिकित्सालय स्थापित करना।
2013-18 के कार्यकाल में (और उसके बाद भी) मिज़ोरम में 50 बिस्तरों का मानसिक चिकित्सालय स्थापित नहीं हुआ: राज्य स्वास्थ्य विभाग की सरकारी अस्पतालों की अपनी सूची में कोई समर्पित मानसिक/मनोरोग अस्पताल नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य सेवा सामान्य अस्पतालों के मनोरोग विंग और जिला कार्यक्रमों तक सीमित रही।
मौजूदा कैंसर केंद्र को पूर्ण 100-बिस्तर वाले कैंसर अस्पताल में उन्नत करना।
ज़ेमाबॉक का कैंसर केंद्र (मिज़ोरम राज्य कैंसर संस्थान) कार्यकाल में पूर्ण 100-बिस्तर वाले कैंसर अस्पताल में उन्नत नहीं हुआ: राज्य स्वास्थ्य विभाग इसे 50 बिस्तरों का बताता है, और 2024 में भी यह लगभग 60 बिस्तरों पर चल रहा था।
शिशु मृत्यु दर को मौजूदा 30 से घटाकर 18 और मातृ मृत्यु दर को 68 से घटाकर 35 प्रति लाख करना।
लक्ष्य पूरे नहीं हुए। NFHS-4 (2015-16) ने मिज़ोरम की शिशु मृत्यु दर 40 प्रति 1,000 जीवित जन्म मापी — जो घोषणापत्र के दावे वाले 30 के आधार से भी ऊँची और वादे के 18 से बहुत दूर थी; NFHS-5 (2019-21) में भी यह 21 रही। किसी आधिकारिक शृंखला में मातृ मृत्यु दर वादे के स्तर तक पहुँचती नहीं दिखती।
स्थापित विद्युत क्षमता कम से कम 280 मेगावाट तक बढ़ाकर और अगले पाँच वर्षों में सभी जनगणना गाँवों का विद्युतीकरण कर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना।
विद्युतीकरण वाला आधा वादा पूरा हुआ: DDUGJY के तहत सभी जनगणना गाँव विद्युतीकृत हुए और अप्रैल 2018 तक सौभाग्य योजना में मिज़ोरम ने 100% घरेलू विद्युतीकरण किया; दिसंबर 2017 में 60 मेगावाट की तुइरियल जल-विद्युत परियोजना भी चालू हुई। पर 280 मेगावाट स्थापित क्षमता का लक्ष्य बड़े अंतर से चूका।
पूर्व-पश्चिम संपर्क के लिए नई सड़कें बनाना, मौजूदा सड़क-जाल सुधारना, और सड़क घनत्व 31 मार्च 2011 के 46.53 किमी से बढ़ाकर अगले पाँच वर्षों में 50 किमी प्रति 100 वर्ग किमी करना।
कार्यकाल में सड़क निर्माण और सुधार आगे बढ़ा — जिसमें अगस्त 2014 में हस्ताक्षरित 10.7 करोड़ डॉलर की विश्व बैंक-वित्तपोषित मिज़ोरम राज्य सड़क II क्षेत्रीय संपर्क परियोजना (बांग्लादेश और म्यांमार की ओर लुंगलेई-त्लाबुंग-कावरपुइछुआह और चम्फाई-ज़ोखावथार गलियारे) तथा सड़क परिवहन मंत्रालय की परियोजनाएँ शामिल हैं।
अगले 5 वर्षों में PMGSY के ज़रिए मिज़ोरम के सभी जनगणना गाँवों को ट्रक-योग्य सड़कों से जोड़ना।
कार्यकाल में PMGSY के काम से ग्रामीण संपर्क बढ़ता रहा, पर पाँच वर्षों में सभी जनगणना गाँवों को ट्रक-योग्य सड़कों से जोड़ने का वादा पूरा नहीं हुआ: 2018 के अंत तक कई गाँव असंबद्ध रहे, और 2024 में भी राज्यपाल ने बताया कि 118 गाँव अब भी हर-मौसम सड़क से वंचित हैं।
2017 तक राज्य के सभी कस्बों और गाँवों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना।
NRDWP और ग्रेटर आइजोल जल-आपूर्ति चरणों में ग्रामीण व शहरी योजनाएँ बढ़ीं, पर 2017 तक सभी कस्बों व गाँवों को सुरक्षित पेयजल देने का वादा स्पष्ट रूप से चूका: सभी 728 गाँवों तक पाइप-जल की सार्वभौमिक कवरेज बहुत बाद में जाकर हासिल हुई।
यह सुनिश्चित करना कि कलादान बहु-साधन पारगमन परिवहन परियोजना समय पर पूरी हो, और राज्य सरकार के रूप में उसकी प्रगति रोकने वाली समस्याएँ हल करना।
कलादान परियोजना कार्यकाल में न समय पर पूरी हुई, न बिल्कुल। मूलतः 2014 के आसपास पूरी होनी थी, पर 2018 के अंत तक अधूरी रही: निर्णायक 109 किमी पलेटवा-ज़ोरिनपुई सड़क का ठेका जून 2017 में ही दिया गया, और गलियारा तब भी अधूरा था।
मिज़ोरम में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन पर अधिक ध्यान देना और उसे अन्य केंद्रीय व राज्य योजनाओं से जोड़ना।
इस अवधि में मिज़ोरम मनरेगा के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाले राज्यों में था, जहाँ 2016-17 में प्रति परिवार लगभग 76 मानव-दिवस काम मिला (राष्ट्रीय औसत लगभग 46 के मुक़ाबले), और अभिसरण संस्थागत हुआ — राज्य आजीविका मिशन तथा विभागों ने टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों के लिए मनरेगा-अभिसरण कार्य चलाए।
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